पाषाण युग की यात्रा - जहाँ पत्थर बोलते हैं
भीमबेटका रॉक शेल्टर भारत के मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन जिले में स्थित एक पुरापाषाणिक पुरातात्विक स्थल है। यह भारतीय उपमहाद्वीप पर मानव जीवन के शुरुआती निशानों को प्रदर्शित करता है और भारत में पाषाण युग की शुरुआत का प्रमाण है। इसे 2003 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। यहाँ की गुफाओं में बने चित्र लगभग 30,000 साल पुराने हैं, जो उस समय के मानव की कलात्मक सोच और सामाजिक संरचना को दर्शाते हैं।
भीमबेटका की खोज 1957 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने की थी। वे ट्रेन से भोपाल से इटारसी जा रहे थे, तभी उन्हें खिड़की से ये चट्टानें दिखाई दीं जो उन्हें स्पेन और फ्रांस की गुफाओं जैसी लगीं। बाद में जब वे वहां पहुंचे, तो उन्हें प्रागैतिहासिक काल का यह खजाना मिला।
भीमबेटका में आदिमानव के रहने के प्रमाण पुरापाषाण काल से लेकर मध्यपाषाण काल तक लगातार मिलते हैं।
यहाँ 700 से ज्यादा रॉक शेल्टर हैं, जिनमें से लगभग 400 में चित्र मिले हैं। इन चित्रों में शिकार, नृत्य, जानवरों की लड़ाई, और रोजमर्रा की जिंदगी को दिखाया गया है। आदिमानव ने लाल रंग (गेरू), सफेद (चूना), और हरा (कच्चे पन्ने) जैसे प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया था।

दुनिया के सबसे पुराने रॉक आर्ट संग्रहों में से एक, जो मानव विकास की कहानी कहता है।

विशाल शिवलिंग वाला प्राचीन मंदिर जिसे 'पूर्व का सोमनाथ' कहते हैं।