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अमृतसर: स्वर्ण मंदिर दर्शन

सिख धर्म और शहादत की पवित्र भूमि

स्वर्ण मंदिर का दिव्य इतिहास

स्वर्ण मंदिर (श्री हरिमंदिर साहिब) सिख धर्म का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है। यह केवल एक गुरुद्वारा नहीं, बल्कि मानवता और समानता का प्रतीक है। इसका निर्माण सिखों के पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव जी ने शुरू करवाया था। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता का संदेश देने के लिए 1588 ई. में लाहौर के सूफी संत साईं मियां मीर से इसकी नींव रखवाई थी।

1. वास्तुकला और स्वर्ण आवरण

मंदिर के चार दरवाजे हैं जो यह दर्शाते हैं कि यह हर धर्म और जाति के लिए खुला है। 19वीं सदी में महाराजा रणजीत सिंह ने इसके ऊपरी हिस्से को संगमरमर और सोने की परत से ढकवाया, जिसके बाद इसे 'स्वर्ण मंदिर' कहा जाने लगा।

2. अकाल तख्त और सरोवर

मंदिर एक पवित्र सरोवर (अमृत सरोवर) के बीच में स्थित है। मंदिर के ठीक सामने श्री अकाल तख्त साहिब है, जो सिखों की सर्वोच्च संस्था और न्याय का प्रतीक है।

10 रोचक तथ्य (Amazing Facts)

प्रमुख दर्शनीय स्थल

Golden Temple

श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर)

सिख धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल। यहाँ का शांत वातावरण और लंगर सेवा अद्वितीय है। इसे 'दरबार साहिब' भी कहा जाता है।

पवित्र स्थल लंगर सेवा
Jallianwala Bagh

जलियांवाला बाग

स्वर्ण मंदिर के पास स्थित यह बाग 1919 के नरसंहार की याद दिलाता है। यहाँ की दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी मौजूद हैं जो शहीदों की कुर्बानी बयां करते हैं।

शहीद स्मारक
Wagah Border

वाघा बॉर्डर (अटारी)

भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित। यहाँ हर शाम होने वाली 'बीटिंग रिट्रीट' सेरेमनी देशभक्ति का एक अद्भुत प्रदर्शन है।

बॉर्डर परेड