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नर्मदापुरम (होशंगाबाद) दर्शन

मां नर्मदा के पवित्र तट और ऐतिहासिक धरोहर

होशंगाबाद का समृद्ध इतिहास

मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे बसा यह शहर प्राचीन और धार्मिक महत्व रखता है। प्राचीन काल में इसे 'नर्मदापुरम' के नाम से जाना जाता था। 15वीं शताब्दी (लगभग 1405-1435 ई.) में मालवा के शासक सुल्तान होशंग शाह गौरी ने इस शहर की पुनः स्थापना की और इसका नाम 'होशंगाबाद' रखा। उन्होंने यहाँ एक छोटा किला भी बनवाया था, जिसके अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं।

सामरिक और धार्मिक महत्व

नर्मदा नदी के तट पर स्थित होने के कारण यह शहर हमेशा से व्यापार और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण रहा है। मुगलों के बाद यहाँ मराठों और फिर अंग्रेजों का शासन रहा। धार्मिक रूप से यह शहर अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहाँ का सबसे प्रसिद्ध 'सेठानी घाट' 19वीं सदी में जानकीबाई सेठानी द्वारा बनवाया गया था।

नर्मदापुरम की वापसी

फरवरी 2022 में, मध्य प्रदेश सरकार ने शहर की प्राचीन पहचान को वापस लाने के लिए इसका नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर फिर से 'नर्मदापुरम' कर दिया। यह पचमढ़ी (सतपुड़ा की रानी) जाने का मुख्य प्रवेश द्वार भी है।

10 रोचक तथ्य

प्रमुख दर्शनीय स्थल

Sethani Ghat

सेठानी घाट

यह भारत के सबसे बड़े और पवित्र घाटों में से एक है। नर्मदा जयंती पर यहाँ लाखों दीप जलाए जाते हैं। यह घाट अपनी भव्यता और शांति के लिए प्रसिद्ध है।

नर्मदा आरती प्राचीन घाट
Satpura Tiger Reserve

सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व (मढ़ई)

शहर के पास स्थित यह रिज़र्व अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ आप जंगल सफारी और बोट सफारी का आनंद ले सकते हैं और बाघ, तेंदुए जैसे जानवर देख सकते हैं।

जंगल सफारी प्रकृति
Tawa Dam

तवा डैम

तवा नदी पर बना यह बांध एक शानदार पिकनिक स्पॉट है। यहाँ आप क्रूज राइड का मज़ा ले सकते हैं और सूर्यास्त का अद्भुत नज़ारा देख सकते हैं।

क्रूज राइड सनसेट पॉइंट
Adamgarh Hills

आदमगढ़ की पहाड़ियाँ

शहर से केवल 2 किमी दूर, यह स्थान पाषाण युग के रॉक पेंटिंग्स (शैलचित्रों) के लिए प्रसिद्ध है। यह इतिहास प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन जगह है।

शैलचित्र पुरातत्व